इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े कारागार तिहाड़ जेल में जमा हो रहे कचरे से बिजली बनाई जाएगी। इसके लिए जेल परिसर में 'बायोटेक प्लांट' स्थापित करने का प्रस्ताव जेल प्रशासन को मिला है। यदि इस प्रस्ताव को जेल प्रशासन की हरी झंडी मिल गई, तो इस प्रस्ताव को कुछ महीनों के भीतर ही अमली जामा पहना दिया जाएगा। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जेल प्रशासन के पास इस संदर्भ में एक प्रस्ताव भेजा है।
तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने आईएएनएस को बताया कि, "नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें जेल के अंदर ही कूड़े और लकड़ी के बुरादे से बिजली बनाने का प्रस्ताव जेल प्रशासन के सामने रखा गया है। इसके लिए जेल परिसर के अंदर बायोटेक प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव है।"
तिहाड़ जेल की बैरकों में लग रहे कचरे के ढेर को और जेल फैक्ट्री से निकलनेवाले कचरे को संज्ञान में लेते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जेल प्रशासन के पास प्रस्ताव भेजा है, जिसमें जेल के अंदर ही बायोटेक प्लांट बनाकर कूड़े-कचरे और लकड़ी के बुरादे का उपयोग बिजली बनाने में किया जाएगा।
तिहाड़ जेल की बैरकों में लग रहे कचरे के ढेर को और जेल फैक्ट्री से निकलनेवाले कचरे को संज्ञान में लेते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जेल प्रशासन के पास प्रस्ताव भेजा है, जिसमें जेल के अंदर ही बायोटेक प्लांट बनाकर कूड़े-कचरे और लकड़ी के बुरादे का उपयोग बिजली बनाने में किया जाएगा।
प्रवक्ता का कहना है कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के इस प्रस्ताव को जेल प्रशासन की हरी झंडी का इंतजार है, जिसके बाद जेल परिसर में यह बायोटेक प्लांट स्थापित किया जाएगा। प्रवक्ता का कहना है कि इस प्लांट के स्थापित हो जाने के बाद जेल प्रशासन अपने ही द्वारा उत्पादित बिजली का उपयोग कर सकेगा। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पन्न होने पर जेल प्रशासन इसे बेचकर कमाई भी कर सकेगा। इस बायोटेक प्लांट के स्थापित होने के बाद जेल प्रशासन के सामने गैस की बचत होने की भी संभावना है।
उल्लेखनीय है कि जेल में बिजली की खपत को देखते हुए जेल प्रशासन की तरफ से 'अर्थ आवर' मनाया जा रहा है। इसके तहत जेल में सुबह और शाम दो-दो घंटे बिजली की कटौती की जा रही है।
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