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Tuesday, 12 June 2012

सफाई से साफ हो रहा छावनी का कूड़ा

घर से निकलने और नालों में बहने वाला कूड़ा एक निजी संस्था के लिए धनवर्षा कर रहा है। संस्था बिना संसाधन लगाए पहले तो छावनी परिषद से कूड़ा हासिल कर रही है, इसके लिए संस्था को हर माह 4.17 लाख रुपये का भुगतान देने का भी करार हुआ है। करार के दो माह बाद भी कूड़ा निस्तारण कर खाद बनाने की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है।
छावनी परिषद की चार अक्टूबर की बोर्ड बैठक में निजी संस्था को कूड़े के साथ हर माह 4.17 लाख रुपये देने का प्रस्ताव सदस्यों के विरोध के बीच पारित हुआ था। इससे पहले 30 जुलाई को यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में कड़े विरोध के कारण खारिज हो गया था। दोबारा प्रस्ताव पारित कर सालाना करीब पचास लाख रुपये का भुगतान निजी संस्था को देने का करार हुआ। इतना ही नहीं परिषद ने अपने कर्मचारियों और संसाधनों से ही कूड़ा सुल्तानपुर रोड स्थित टिंचिंग ग्राउंड पर ले जाने का निर्णय लिया। बोर्ड बैठक में बताया गया कि कूड़े के साथ सालाना पचास लाख रुपये के एवज में संस्था टिंचिंग ग्राउंड पर जैविक खाद तैयार करेगी।
कूड़े से तैयार खाद को बेचकर संस्था छावनी परिषद को उसका पचास फीसदी हिस्सा भी देगी। प्रस्ताव पारित होने के साथ ही जैविक खाद से होने वाली आय छावनी परिषद को दिया जाना है। करार होते ही संस्था ने टिंचिंग ग्राउंड के कुछ हिस्सों पर तीन टै्रक्टर ट्राली मिट्टी डालकर दिया।
उसने न तो यहां जैविक और रसायनिक कूड़े को अलग किया और न ही खाद तैयार करने के लिए अपने कर्मचारियों की तैनाती की। प्रतिदिन छावनी के सैन्य व असैन्य इलाकों से चार ट्रक कूड़ा टिंचिंग ग्राउंड पर फेंका जाता है। छावनी परिषद कर्मचारी ही कूड़े में आग लगाकर इसका निस्तारण भी करते हैं।

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