गतिरोध 2012
-नियमित सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति
-शहर में कूड़ा फेंकने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं
-नगर निगम के साथ शहरवासी भी जिम्मेदार
आलोक कुमार मिश्रा, भागलपुर, नगर संवाददाता
स्वच्छ व सुंदर शहर के सपने को गंदगी का ग्रहण लग गया है। इसके लिए अकेले नगर निगम नहीं बल्कि शहरवासी भी जिम्मेदार हैं। एक तरफ जहां नगर निगम शहरी सुविधाएं बहाल करने में अक्षम साबित हो रहा है, वहीं आम-आवाम जहां-तहां गंदगी का ढेर जमा कर शहर की सुरत पर कालिख पोतने का काम रहे हैं।
निर्धारित जगह के अभाव में कूड़े का सही ढंग से उठाव नहीं होना भी एक कारण है। ऐसी स्थिति में शहर के कई इलाके उचित सफाई से महरूम हैं। यद्यपि,कुछ इलाकों में नियमित सफाई जरूर होती है, लेकिन अधिकांश जगहों पर सफाई के नाम महज खानापूर्ति ही होती है। यही वजह है कि शहर में गंदगी फैली हुई। वहीं नाला जाम होने से उसका पानी सड़कों पर बहने लगता है, जिसके बदबू से शहरवासी परेशान हैं।
कूड़ा फेंकने का निर्धारित स्थान नहीं : प्रशासन की ओर जमीन आवंटित नहीं कराने से नगर निगम के सामने कूड़ा फेंकने की समस्या बनी है। ढाई साल पूर्व शहर का कूड़ा दाउदबाट में गिराया जाता था। लेकिन अब उस जमीन पर जिला प्रशासन द्वारा महादलितों को बसा दिया गया है। नतीजतन, निर्धारित जमीन के अभाव में जहां-जहां कूड़े फेंके जा रहे हैं। लोगों की मांग के अनुसार गढ्डे में कूड़े गिराए जा रहे हैं।
नाथनगर दिग्घी में जमीन मिलने की संभावना : कूड़ा फेंकने के लिए अब नाथनगर प्रखंड के दिग्घी मौजा में गैर उपजाऊ जमीन को चिह्नित किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से यहां 22.59 एकड़ जमीन निगम को स्थानांतरित करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। उक्त जमीन के लिए नगर निगम द्वारा एक करोड़ 19 लाख 72 हजार 700 रुपये की मूल्य निर्धारित की गई है। दो माह पूर्व नगर निगम द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग को विधिवत जानकारी भी दी गई है।
कूड़े से होगा जैविक खाद व विद्युत का उत्पादन : आवंटन के बाद कूड़े के ढेर से जैविक खाद व विद्युत का उत्पादन होगा। कूड़े को जलाए बिना विद्युत उत्पादन करने के लिए रोकेन सप्रेशन सिस्टम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई उपकेंद्र बनाकर विद्युत उत्पादन के लिए नगर निगम द्वारा सहमति दी गई है। इस योजना के लिए कंपनी यहां तीन एकड़ जमीन खरीदेगी। कूड़े से तैयार जैविक खाद या फिर बिजली उत्पादन से निगम को राजस्व का लाभ नहीं होगा।
संसाधन भी हैं : कूड़े उठाने व शहर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के पास दो माध्यम हैं। शहर में नगर निगम की कर्मियों और ठेका कंपनी रैमकी द्वारा शहर की सफाई कराई जाती है। निगम के पास नौ ट्रैक्टर, 12 ट्रेलर, एक्वेटर पेल आडर, 80 हाथ ठेला, 12 व्हील बेरी, एक जेवीसी तथा 243 नियमित व 200 अस्थाई कर्मी हैं। वहीं रैमकी के पास 14 ऑटो टीयर, 7 डीपी व्हील, एक डंफर, एक जेवीसी, 22 ट्राय साइकिल, 10 पूस कार्ड, एक स्वीपिंग मशीन, 6 ट्रैक्टर हैं।
कई जगहों पर नहीं है डस्टबीन
सिकंदरपुर, लहेरीटोला, कमलनगर कॉलोनी, शहीद चौक, मुख्य डाकघर सहित शहर के कई इलाकों में डस्टबीन की व्यवस्था नहीं है। पूरे शहर में करीब 80 डस्टबीन चार-पांच साल पूर्व बनाए गए थे। इनमें अधिकांश जर्जर या टूट चुके हैं। रैमकी द्वारा सड़क किनारे रखे गए डस्टबीन का भी उचित इस्तेमाल नहीं हो रहा है। एक से सवा किलोमीटर की दूरी पर एक डस्टबीन होने से लोग घर या सड़क व नाले में ही कूड़े फेंके देते हैं। उचित सफाई के अभाव में सड़कों पर कूड़े का ढेर जमा हो जाता है, फिर नाला जाम की समस्या भी खड़ी हो जाती है। मानिक सरकार, लहेरीटोला, सिकंदरपुर, बूढ़ानाथ रोड से खलीफाबाग जाने वाली सड़क, कमलनगर कॉलोनी, कचहरी परिसर आदि जगहों में कूड़े का ढेर है।
प्रतिदिन 150-160 टन कूड़े की सफाई : नगर निगम व ठेका कंपनी रैमकी द्वारा प्रतिदिन 150 से 160 टन कूड़े की सफाई की जाती है। इनमें रैमकी द्वारा करीब 110 टन कूड़े की सफाई की जाती है। इस हिसाब से प्रतिमाह करीब पांच हजार व एक साल में 60 हजार टन कूड़े की सफाई होती है।
90 लाख रुपये होते हैं खर्च :
सफाई व्यवस्था में एक महीने में करीब 90 लाख रुपये नगर निगम खर्च करता है। इस हिसाब से सलाना 10 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च होते हैं।
कोई नाखुश तो कोई संतुष्ट : सफाई व्यवस्था से कोई नाखुश हैं तो कोई संतुष्ट भी हैं। वार्ड संख्या 29 के बरारी निवासी कोको दुबे व ललन ठाकुर, वार्ड संख्या 16 के विक्रमशिला कॉलोनी निवासी अधिवक्ता संजय कुमार सिंह व वार्ड संख्या 31 के सचिदानंदगनर कॉलोनी निवासी नारायण शर्मा ने सफाई व्यवस्था पर संतुष्टि जाहिर की है। वहीं वार्ड संख्या 46 के सिकंदरपुर निवासी अधिवक्ता संजय कुमार मोदी, वार्ड संख्या 17 के बूढ़ानाथ मोहल्ला निवासी रामनाथ गुप्ता व वार्ड संख्या 50 के कमलनगर कॉलोनी निवासी राजेंद्र कुमार दर्वे का कहना है कि इन जगहों में वर्षो से सफाई नहीं हुई है।
नियमित सफाई की खानापूर्ति : गत वर्ष गतिरोध अभियान के तहत दैनिक जागरण ने शहर की सफाई व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण समस्याओं की बात उठाई थी। उसके बाद संबंधित अधिकारी को ज्ञापन दिया था। नतीजा यह निकला कि नियमित सफाई के नाम पर सालभर खानापूर्ति की गई। दो चार बार नाले की सफाई की गई, लेकिन उचित सफाई नहीं होने से अधिकांश नाले जाम हैं।
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कोट :-
'छोटे-बड़े नालों की सफाई की जाती है। लोग घर का कूड़ा सड़क व नाले में फेंका देते हैं। इस कारण नाला जाम होता है। मकान का मलबा तक लोग सड़क व नाला में डाल देते हैं। इस कारण जहां-तहां कूड़ा जमा हो जाता है।'
महेश प्रसाद, स्वास्थ्य प्रभारी, नगर निगम
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